रियल एस्टेट निवेश के नाम पर बड़ा खेल?
जालंधर से जुड़ा 16.81 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला अब दिल्ली तक पहुंच गया है। समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, लुधियाना पुलिस ने जालंधर निवासी अतुल मेहता को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। उस पर रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की रकम लेने और कथित तौर पर उसे वापस न करने के आरोप हैं।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता सतपाल सचदेवा ने थाना मॉडल टाउन में अतुल मेहता और उसकी पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया था। आरोप है कि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में निवेश करवाने के नाम पर शिकायतकर्ता से 16.81 करोड़ रुपये लिए गए।
शिकायत के मुताबिक, अतुल मेहता ने खुद को ए.जी.आई. इंफ्रा का डायरेक्टर बताते हुए निवेश के लिए भरोसा दिलाया। आरोप है कि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में निवेश करने, जमीन खरीदने और प्रोजेक्ट विकसित करने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से रकम ली गई।
16.81 करोड़ रुपये कहां लगाए गए?
रिपोर्ट में शिकायतकर्ता के हवाले से कहा गया है कि करीब 16.81 करोड़ रुपये की राशि प्रॉपर्टी में निवेश करने के नाम पर ली गई।
आरोप यह भी है कि रकम लेने के बाद जमीन खरीदने या प्रोजेक्ट विकसित करने के वादे पूरे नहीं हुए और शिकायतकर्ता को कथित तौर पर रकम वापस नहीं मिली।
चेक और बैंक रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
शिकायतकर्ता ने अतुल मेहता की ओर से दिए गए कई चेक का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट के अनुसार, उसकी पत्नी की ओर से भी करीब 1.50 करोड़ रुपये का चेक दिए जाने की बात सामने आई है।
शिकायत में चेक के हस्ताक्षरों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं और पुलिस द्वारा बैंक रिकॉर्ड की जांच की बात कही गई है।
दिल्ली से गिरफ्तारी के बाद अब आगे क्या?
पुलिस ने अतुल मेहता को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब पुलिस मामले में करोड़ों रुपये के लेन-देन का रिकॉर्ड खंगालेगी, जिसमें बैंक खाते, कथित समझौते, चेक और प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
पुलिस यह भी जांच करेगी कि शिकायतकर्ता से प्राप्त रकम वास्तव में कहां इस्तेमाल हुई और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट से जुड़े दावों की वास्तविकता क्या थी।
एक और बड़ा सवाल
इस मामले में ए.जी.आई. से जुड़े होने के दावे को लेकर भी जांच का एंगल सामने आया है। रिपोर्ट में ए.जी.आई. के एमडी सुखदेव सिंह के हवाले से कहा गया है कि मेहता का कंपनी के साथ कोई लेन-देन नहीं था और वह कुछ समय पहले ही डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे चुका था।
अब जांच का अहम हिस्सा यही होगा कि 16.81 करोड़ रुपये का पूरा लेन-देन किसके जरिए हुआ, पैसा कहां गया और रियल एस्टेट निवेश से जुड़े दावों में कितनी सच्चाई थी।









