जालंधर नॉर्थ से सेंट्रल तक सट्टे के बाजार को लेकर चर्चाएं तेज़, पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक संरक्षण पर उठ रहे गंभीर सवाल!
जालंधर में अवैध लॉटरी और सट्टे के कारोबार को लेकर एक बार फिर सवालों का बाजार गर्म है। शहर के जालंधर नॉर्थ से लेकर जालंधर सेंट्रल तक इस नेटवर्क की चर्चाएं हो रही हैं। सवाल यह है कि अगर अवैध गतिविधियों पर कानून का शिकंजा कसने के दावे किए जाते हैं, तो फिर ऐसे कारोबार को लेकर बार-बार सवाल क्यों उठते हैं? क्या संबंधित विभागों को इस पूरे मामले की जानकारी है? और अगर जानकारी है, तो अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही?
सबसे बड़ा सवाल ‘कालू’ के नेटवर्क को लेकर है। आखिर यह कारोबार किसके भरोसे चलने की चर्चा में है? क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी? क्या पुलिस उन लोगों तक पहुंचेगी, जो कथित तौर पर इस कारोबार को संचालित कर रहे हैं? या फिर कार्रवाई छोटे स्तर पर ही सीमित रह जाएगी और बड़े नाम सवालों के घेरे से बाहर रहेंगे?
इस कारोबार को लेकर पहले भी अलग-अलग राजनीतिक कार्यकालों में संरक्षण के आरोप और चर्चाएं सामने आती रही हैं। पूर्व विधायक के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे, अब राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं, ऐसे में सवाल और भी तीखा हो जाता है—अगर पहले किसी का राजनीतिक प्रभाव इस कारोबार से जोड़कर देखा जाता था, तो आज आखिर वह कौन-सी ताकत है, जिसके कारण इस कथित नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं?
क्या सत्ता बदलने से व्यवस्था बदलती है, या सिर्फ संरक्षण देने वालों के नाम बदलने की चर्चाएं होती हैं? यह सवाल किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और प्रशासन की जवाबदेही से जुड़ा है।
अगर जालंधर नॉर्थ और जालंधर सेंट्रल में अवैध लॉटरी और सट्टे की गतिविधियां चल रही हैं, तो संबंधित पुलिस थानों और विभागों को इसकी जांच करनी चाहिए। कथित कारोबार के ठिकानों, पैसों के लेन-देन, संभावित संचालकों और किसी भी संरक्षण के आरोप की निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए। यदि आरोप गलत हैं, तो तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए; और यदि उल्लंघन सामने आते हैं, तो कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
आखिर सवाल यह भी है कि क्या कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित रहेगी या पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचा जाएगा? क्या जिम्मेदारी तय होगी? क्या जनता को बताया जाएगा कि शिकायतों पर क्या कदम उठाए गए?
हैशटैग नेतागिरी का सीधा सवाल!
जालंधर की जनता को आश्वासन नहीं, जवाब चाहिए। शहर में कानून का राज सर्वोपरि होना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक पहुंच, रसूख या कथित संरक्षण के आधार पर कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।
आखिर ‘कालू’ के काले कारोबार की सच्चाई क्या है? इस नेटवर्क के पीछे कौन है? क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण है









