गमाडा में 57 करोड़ की मेहरबानी पर ED का शिकंजा! अफसरों और बिल्डर पर FIR की तैयारी

सेक्टर-62 की 1.13 एकड़ फूड कोर्ट साइट से जुड़ा मामला; जांच के घेरे में बकाया माफी की प्रक्रिया, 40 करोड़ की छूट रद्द और बिल्डर प्रमोटर की गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल।

1.13 एकड़ की साइट से शुरू हुई जांच

मोहाली के सेक्टर-62 में स्थित 1.13 एकड़ की फूड कोर्ट साइट को लेकर गमाडा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में कंपनी को बकाया राशि में दी गई छूट की प्रक्रिया की जांच कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी की पड़ताल गमाडा के मुख्य अभियंता अजय गर्ग के बयान और जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों पर आधारित है।

अजय गर्ग से अगस्त में पूछताछ की गई थी। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि कंपनी को बकाया भुगतान में राहत किस प्रक्रिया के तहत दी गई। यह छूट मुख्य सचिव-कम-चेयरमैन केएपी सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित गमाडा की बैठक में मंजूर की गई थी।

2015 में 32.50 करोड़ में हुई थी नीलामी

इस फूड कोर्ट साइट की नीलामी सितंबर 2015 में 32.50 करोड़ रुपये में हुई थी। मामले की तह तक पहुंचने के लिए ED ने अगस्त में गमाडा के मुख्य अभियंता अजय गर्ग, पूर्व मुख्य अभियंता सुनील कंसल और तत्कालीन एस्टेट अधिकारी हरदीप सिंह से पूछताछ की। अधिकारियों से संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजी साक्ष्य भी मांगे गए थे।

यह जांच धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत चल रही है। एजेंसी जमीन के सौदे, बकाया राशि में दी गई राहत और उससे जुड़े फैसलों की जांच कर रही है।

50 घंटे की तलाशी में मिले दस्तावेज भी खंगाले जा रहे

सूत्रों के अनुसार, 22 से 24 सितंबर के बीच गमाडा कार्यालय में ED की तलाशी करीब 50 घंटे तक चली थी। इस दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य सामग्री को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनी को राहत देने के फैसले में किन प्रक्रियाओं का पालन किया गया और क्या कोई अनियमितता हुई।

ED की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को FIR दर्ज करने के लिए पत्र लिखे जाने के बाद आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव ने बिल्डर को दी गई 40 करोड़ रुपये की छूट वापस ले ली।

प्रधान सचिव ने पुनरीक्षण प्राधिकारी के तौर पर कंपनी की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही 5 फरवरी, 2026 को गमाडा के अपीलीय प्राधिकारी-कम-अतिरिक्त मुख्य प्रशासक द्वारा जारी आदेश को भी रद्द कर दिया गया।

रेमिगेट जांच में प्रमोटर जगमोहन गर्ग गिरफ्तार

इस मामले से जुड़ी जांच के बीच पिछले सप्ताह ED ने रेमिगेट प्रकरण में तिरुपति इन्फ्राप्रोजेक्ट्स के प्रमोटर जगमोहन गर्ग को गिरफ्तार किया था। रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को तिरुपति के प्रमोटरों के नियंत्रण वाली संबंधित कंपनी बताया गया है।

गिरफ्तारी के बाद जगमोहन गर्ग को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब जांच का फोकस बिल्डर को दी गई वित्तीय राहत, जमीन से जुड़े फैसलों और कथित अनियमितताओं पर है। मामले में FIR की संभावित कार्रवाई से संबंधित अधिकारियों और बिल्डर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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