अवैध तरीके से लोगों को अमेरिका भेजने के मामले में ED का बड़ा एक्शन, जांच के दौरान सामने आए अहम खुलासे ने बढ़ाई हलचल।
उस पर आरोप है कि वह डंकी रूट के जरिए लोगों को अवैध तरीके से अमेरिका भेजने वाले नेटवर्क का अहम हिस्सा था. विशेष PMLA अदालत ने उसे 30 अक्टूबर 2026 तक ED की हिरासत में भेज दिया है.
ED की जांच पंजाब और हरियाणा पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी. जांच में सामने आया कि अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों को एजेंट और बिचौलिए कानूनी तरीके से विदेश भेजने का झांसा देते थे, लेकिन बाद में उन्हें डंकी रूट के जरिए अमेरिका पहुंचाने की व्यवस्था की जाती थी. इस खतरनाक रास्ते में दक्षिण और मध्य अमेरिका के कई देशों की सीमाएं अवैध तरीके से पार कराई जाती थीं. इसके लिए स्थानीय एजेंटों और डंकरों की मदद ली जाती थी. हर व्यक्ति से करीब 30 लाख से 60 लाख रुपये तक वसूले जाते थे.
छापे में 4.62 करोड़ रुपये नकद बरामद
ED ने इस मामले में जुलाई 2025 में 19 ठिकानों पर छापेमारी की थी. इस दौरान संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और निकारागुआ व इथियोपिया से जुड़े फर्जी इमिग्रेशन और वीजा स्टांप बरामद किए गए थे. इसके बाद दिसंबर 2025 में एजेंटों से जुड़ी करीब 5.41 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया था.
18 और 19 दिसंबर 2025 को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में कई ठिकानों पर की गई तलाशी के दौरान तरुण खोसला के परिसरों से 4.62 करोड़ रुपये नकद, करीब 5.9 किलोग्राम सोने की छड़ें और सिक्के और लगभग 313 किलोग्राम चांदी की छड़ें बरामद की गई थीं. नकदी, सोने और चांदी की कुल कीमत करीब 19.14 करोड़ रुपये बताई गई थी. अन्य ठिकानों से 50 से ज्यादा लोगों के मूल पासपोर्ट, लेनदेन का रिकॉर्ड, डायरियां, संपत्ति के दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी मिले थे.
विदेशी एजेंटों से संपर्क, टिकट और वीजा का इंतजाम
ED के मुताबिक, तरुण खोसला पंजाब और हरियाणा के एजेंटों से लोगों के पासपोर्ट और पैसे लेता था. इसके बाद दिल्ली से दक्षिण अमेरिकी देशों गुयाना, सूरीनाम, इक्वाडोर और अल सल्वाडोर जैसे देशों के लिए वीजा और हवाई टिकट का इंतजाम करता था. वहां से लोगों को अवैध और खतरनाक रास्तों के जरिए अमेरिकी सीमा तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती थी.
जांच एजेंसी को उसके मोबाइल फोन से मिली चैट में विदेशी संपर्कों के साथ बातचीत के सबूत मिले हैं. आरोप है कि वह विदेशी एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन क्लीयरेंस, यात्रियों के इंतजाम, टिकट बुकिंग और अमेरिकी डॉलर में भुगतान से जुड़ी गतिविधियों में शामिल था. ED के अनुसार, वह फर्जी येलो फीवर टीकाकरण प्रमाणपत्र बनवाने और विदेशी एजेंटों के साथ तालमेल बैठाने में भी मदद करता था.
जांच में मेक्सिको में माइक और क्रिस्टी तथा ब्राजील में अली नाम के संपर्कों से बातचीत का भी पता चला है. आरोप है कि ये लोग सीमाएं पार कराने वाले स्थानीय एजेंटों यानी डंकरों और उनसे जुड़े भुगतान का इंतजाम करते थे.
तीन साल में 30.38 करोड़ रुपये नकद जमा
ED की जांच में तरुण खोसला की प्रोपराइटरशिप फर्म एम/एस बीजे इंटरनेशनल के बैंक खाते में वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच 414 लेनदेन के जरिए 30.38 करोड़ रुपये नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है. एजेंसी को शक है कि यह रकम अवैध तरीके से लोगों को विदेश भेजने के कारोबार से जुड़ी हो सकती है.
ED के मुताबिक, यह नेटवर्क कई साल से संगठित तरीके से काम कर रहा था. इसमें एजेंट और बिचौलिए लोगों को विदेश भेजने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलते थे और पूरी यात्रा का इंतजाम करते थे. मामले में पैसों के लेनदेन, विदेशी संपर्कों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है.









