जालंधर। शहर के रियल एस्टेट सिस्टम को हिला देने वाला बड़ा खुलासा सामने आया है। कई कॉलोनियों को जारी की गई ‘NOC’ असल में फर्जी पाई जाने का शक गहराता जा रहा है। सवाल यह है—यह खेल किसने रचा और किसके संरक्षण में चला?
RTI से मिली जानकारी के मुताबिक MS Farms की दो कॉलोनियों और श्री गुरु रविदास चौक के पास काटी गई एक कॉलोनी में प्लॉट रजिस्ट्री के लिए कुल 19 फर्जी NOC जारी की गईं। अगर यह पुष्टि हुई, तो नगर निगम को लाखों नहीं, करोड़ों का नुकसान हुआ है। मामला पंजाब विजिलेंस तक पहुंच चुका है, और जांच तेज़ है।
जांच में क्या सामने आया?
MS Farms की कॉलोनियों में 13 फर्जी NOC
श्री गुरु रविदास चौक के पास अवैध कॉलोनी में 6 फर्जी NOC
इस पूरे प्रकरण में पूर्व MTP और ATP की भूमिका संदिग्ध
सभी फर्जी NOC साल 2023 में जारी—जब सरकार ने बिना NOC रजिस्ट्री पर सख़्त रोक लगा रखी थी
पहले भी उठा था पर्दा, फिर कैसे चलता रहा खेल?
उसी अवधि में वडिंग की कॉलोनी में भी फर्जी NOC पकड़ी गई थी, जिसके बाद कॉलोनाइज़र के खिलाफ FIR की सिफारिश हुई थी। बावजूद इसके, शहर में यह रैकेट बेखौफ चलता रहा—यह अपने आप में बड़ा सवाल है।
सबसे चौंकाने वाला सबूत!
Advance Meetring Technology Ltd. Through Agreement के नाम से जारी NOC—PB/NOC/JUC/JALAN/106428 (दिनांक: 07/08/2023)—अब जांच में फर्जी पाई गई है।
विभागीय दावे से भूचाल!
बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों का साफ कहना है कि ऐसी किसी NOC का रिकॉर्ड विभाग के पास मौजूद ही नहीं। यानी दस्तावेज़ बने, रजिस्ट्रियां हुईं, और सिस्टम सोता रहा—or कोई सुलाता रहा?
अब सवाल सीधे-सीधे ज़िम्मेदारी का है:
फर्जी NOC किसने जारी कीं?
किन अफसरों की मिलीभगत से रजिस्ट्रियां हुईं?
और सबसे अहम—क्या विजिलेंस की जांच में बड़े नाम बेनकाब होंगे?
जालंधर में यह सिर्फ एक घोटाला नहीं, पूरे सिस्टम पर सवाल है। जांच आगे बढ़ रही है—और शहर जवाब मांग रहा है।









