नाभा | शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया नाभा की न्यू जेल से रिहा हो गए। जेल से बाहर निकलते ही उन्होंने “पंजाब केसरी” ग्रुप पर दर्ज कथित झूठे मामलों की कड़ी निंदा की और भावुक होते हुए डेरा ब्यास के मुखी बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों जी सहित संत-महापुरुषों का दिल से धन्यवाद किया।
“बाबा जी का जेल आना मेरे लिए बड़ा आशीर्वाद”
मजीठिया ने कहा, “मेरी कोई औकात नहीं थी कि बाबा जी खुद मुझसे मिलने जेल आएं। यह मेरे जीवन का अविस्मरणीय पल है। उन्होंने मुझ पर जो कृपा और प्यार बरसाया, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी से अक्सर कहा जाता था कि घबराने की जरूरत नहीं—वह मजबूत होकर जेल से बाहर आएंगे।
जेल प्रशासन पर आरोप, VIP सुरक्षा में चूक का दावा
रिहाई के बाद मजीठिया ने जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि डेरा ब्यास प्रमुख की सुरक्षा से समझौता किया गया।
पहले मिलने की अनुमति नहीं दी गई
बाबा जी की गाड़ी पीछे रोकी गई
सुरक्षा कर्मियों को जेल के भीतर आने से रोका गया
चुनिंदा पत्रकारों को अंदर जाने की अनुमति दी गई
मजीठिया ने कहा, “यह बाबा जी की सुरक्षा में बड़ी चूक थी। कोई शरारती तत्व मीडिया कर्मी बनकर नुकसान पहुंचा सकता था—ऐसी स्थिति में जिम्मेदार कौन होता?”
“मुझे भी मरवाया जा सकता था”—तीखा बयान
मजीठिया ने भावुक और सख्त लहजे में कहा, “मुझे भी मूसेवाला की तरह मरवाया जा सकता था। ये चाहते थे कि मैं मरा हुआ बाहर आऊं, लेकिन देखिए—मैं जिंदा बाहर आया हूं। जब ये पत्रकारों को नहीं बख्श रहे, तो मैं क्या हूं?”
उनके इस बयान ने जेल सुरक्षा और वीआईपी मूवमेंट पर नई बहस छेड़ दी है।
समर्थकों में जश्न, राजनीति में हलचल
मजीठिया की रिहाई के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल देखा गया, वहीं सुरक्षा आरोपों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। अब निगाहें प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।









