पंजाब की राजनीति में एक बार फिर वही चेहरे, वही चाल और वही साज़िश लौट आई है।
चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, Navjot Singh Sidhu और Dr. Navjot Kaur Sidhu की अचानक बढ़ी गतिविधियों ने कांग्रेस के भीतर खतरे का अलार्म बजा दिया है।
पार्टी सूत्र बिना लाग-लपेट साफ़ कह रहे हैं—
“सिद्धू दंपत्ति फिर कांग्रेस के लिए सिरदर्द बनने को तैयार है।”
हाईकमान को झुकाया, पद लिया—पर पार्टी को मज़ाक बना दिया
सिद्धू ने हाईकमान से टकराव लेकर प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी हासिल की।
बड़े-बड़े वादे उछाले गए—
कांग्रेस भवन में बिस्तर लगेगा
जनता की शिकायतें रोज़ सुनी जाएंगी
लेकिन ज़मीनी सच्चाई?
न बिस्तर लगा, न कांग्रेस भवन गए, न संगठन संभाला।
पार्टी को संदेश साफ़ मिला—यह राजनीति नहीं, सिर्फ़ ड्रामा था।
BJP में कांग्रेस विरोध, कांग्रेस में रहकर भी कांग्रेस को चोट
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि
BJP में रहते हुए सिद्धू कांग्रेस को रोज़ कोसते थे,
कांग्रेस में आए तो भी हमला नहीं रुका।
“सिद्धू जहां रहते हैं, वहां पार्टी बाद में और ‘मैं’ पहले आती है।”
कैप्टन की कुर्बानी, CM की लालसा—और अपनी ही सरकार पर बम
EXCLUSIVE जानकारी के मुताबिक,
कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने में सिद्धू की भूमिका केंद्रीय रही।
सौदा सीधा था—
कैप्टन गए
सिद्धू को CM चेहरा
लेकिन जब कांग्रेस ने Charanjit Singh Channi को CM बनाया—
तभी से सिद्धू ने अपनी ही सरकार पर सार्वजनिक हमले शुरू कर दिए।
नतीजा?
सरकार अंदर से खोखली
2022 में कांग्रेस का ऐतिहासिक नुकसान
आज भी पार्टी के वरिष्ठ नेता मानते हैं—
“अगर उस वक्त सिद्धू चुप रहते, कांग्रेस सत्ता में होती।”
चार साल ‘गायब’, अब अचानक राजनीति की याद क्यों?
पिछले चार सालों में
Kapil Sharma Show
क्रिकेट कमेंट्री
कैमरे की चमक
और कांग्रेस?
संघर्ष कर रही थी
कार्यकर्ता सड़क पर थे
अब जैसे ही पंजाब में कांग्रेस को समर्थन बढ़ता दिखा—
सिद्धू दंपत्ति को ‘राजनीति की याद’ आ गई।
सूत्र साफ़ कहते हैं—
डर ये है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आ गई, तो कहीं सिद्धू पूरी तरह हाशिये पर न चले जाएं।
फिर वही ब्लैकमेल पॉलिटिक्स—CM बनाओ या पार्टी को उलझाओ
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का सबसे गंभीर दावा—
“या तो हमें CM चेहरा बनाओ, नहीं तो हम माहौल बिगाड़ेंगे।”
हालिया बयान, इशारे और मीडिया एक्टिविटी को
दबाव की राजनीति
ब्लैकमेल पॉलिटिक्स
पार्टी को बंधक बनाने की कोशिश
बताया जा रहा है।
कांग्रेस के सामने साफ़ चेतावनी
राजनीतिक गलियारों में अब एक ही सवाल गूंज रहा है—
क्या कांग्रेस फिर व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की बलि चढ़ेगी?
वरिष्ठ नेता दो टूक कह रहे हैं—
“सिद्धू दंपत्ति का इतिहास सबूत है—जहां ये रहे, पार्टी टूटी।”
“इस बार अगर सख़्ती नहीं हुई, नुकसान तय है।”









