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विधायक रमन अरोड़ा की कमाई की कहानियां अब समुंदर से भी गहरी होती जा रही हैं। ऐसा कोई कारोबार नहीं बचा जिसमें उनका सीधा या परोक्ष दखल न हो। इस बार मामला फिर से प्रॉपर्टी से जुड़ा सामने आया है — जहां रमन अरोड़ा ने नियमों को दरकिनार कर अवैध तरीके से रिहायशी प्रॉपर्टी को कमर्शियल में तब्दील कर करोड़ों का मुनाफा कमाया।
नाज सिनेमा प्रॉपर्टी में अवैध मर्जिंग
अरोड़ा ने नाज सिनेमा के साथ सटी रिहायशी प्रॉपर्टी को खरीदकर सिनेमा परिसर में जोड़ लिया। उस मकान को गिराकर वहां दुकानें बनवा दीं, जिनके ऊपर शोरूम भी बना डाले। नियमानुसार, किसी भी इमारत में अगर नई प्रॉपर्टी जोड़ी जाती है तो दोबारा नक्शा पास करवाना और सी.एल.यू. लेना ज़रूरी होता है। लेकिन मिलीभगत के चलते ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। आरोप हैं कि अरोड़ा ने बिना किसी मंजूरी के सात दुकानें अवैध रूप से खड़ी कर दीं, और सड़क तक का रास्ता भी सिनेमा प्रॉपर्टी से दे डाला। सूत्रों के अनुसार, एक-एक दुकान की कीमत करीब एक करोड़ रुपये तक वसूली गई। हैरानी की बात यह है कि विधायक की गिरफ्तारी के बावजूद न तो इस प्रॉपर्टी को सील किया गया और न ही उस पर कोई कार्रवाई हुई। सवाल ये उठता है — क्या विधायक जेल से भी अपनी पहुंच का असर दिखा रहे हैं?
रामामंडी में धमकाकर वसूले 45 लाख रुपए
रमन अरोड़ा पर रामामंडी में एक और गंभीर आरोप लगा है। बताया गया है कि वहां डॉक्टर और कैमिस्ट द्वारा बनाई जा रही दुकानों का निर्माण कार्य रुकवा दिया गया। नियमों के मुताबिक, दुकानों के लिए 16.5 फुट जगह पार्किंग के लिए छोड़ना जरूरी था। विधायक ने पहले दबाव बनाया और फिर 45 लाख रुपए की “सैटिंग” करवा कर बिना नियमों की पालना किए दुकानें बनवा दीं। इनमें से दो दुकानें पहले ही बिक चुकी हैं।
शराब तस्करी में संरक्षण का आरोप
विधायक पर यह भी आरोप है कि वह शराब तस्कर सोनू टैंकर जैसे लोगों को संरक्षण देते हैं। जब सैंट्रल हलके की पुलिस सोनू को पकड़ने में नाकाम रही, तब थाना सात की टीम ने ए.डी.सी.पी. आदित्य के नेतृत्व में उसे गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि रमन अरोड़ा के इशारे पर ही सैंट्रल हलके में सोनू टैंकर, पहलवान और अन्य उनके करीबी लोग शराब का धंधा चला रहे थे, ताकि कार्रवाई होने पर वही थाना मददगार साबित हो सके।
राजू मदान की गिरफ्तारी के बाद खुल सकते हैं कई और राज
रमन अरोड़ा के समधी राजू मदान की गिरफ्तारी के बाद कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, विधायक के पीछे एक मास्टरमाइंड भी सक्रिय था, जिसकी राय वह कभी नजरअंदाज नहीं करते थे। तहसील में फर्जी दस्तावेज बनवाने से लेकर, अवैध निर्माण में मदद करने और सैटिंग कराने तक—राजू मदान इन सभी गतिविधियों का प्रमुख सूत्रधार था, और वह सीधे विधायक को इसमें शामिल करता था।
विधायक रमन अरोड़ा का नाम लगातार विवादों में घिरता जा रहा है। अवैध निर्माण, धमकी देकर वसूली, शराब तस्करी में संरक्षण और फर्जीवाड़े जैसे गंभीर आरोपों के बीच अब देखना यह है कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है। क्या कानून सब पर बराबर लागू होगा, या राजनीति एक बार फिर न्याय की राह में रोड़ा बनकर खड़ी होगी?









